आर्मेनिया भारत संबंध:आर्मेनिया ने घोषणा की है कि वह सुरक्षा के लिए रूस पर नहीं भारत पर निर्भर है

आर्मेनिया ने घोषणा की है कि वह सुरक्षा के लिए रूस पर नहीं भारत पर निर्भर है

अज़रबैजान से बढ़ते खतरों के कारण सैन्य उपकरणों और हथियारों के लिए भारत पर लगातार निर्भर रहने वाले देश आर्मेनिया ने घोषणा की है कि वह सुरक्षा के लिए रूस पर निर्भर नहीं रह सकता और रूस के साथ सुरक्षा गठबंधन (CSTO) छोड़ रहा है। इस CSTO समूह में बने रहने से होने वाले नुक्शान के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान जो फैसला लिया उस फैसले ने आर्मेनियाई लोगों में गुस्सा और भ्रम पैदा कर दिया है।

फैसले के बाद सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने आर्मेनिया के येरेवान में सरकार के खिलाफ विरोद किया। इस वजह से पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल भी किया। अर्मेनिया के लोगो ने अपनी सुरक्षा के लिए लंबे समय से रूस पर भरोसा किया है।

क्या है रूस का बनाया हुआ CSTO ग्रुप ?

Collective Security Treaty Organization (CSTO) हिंदी में सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन जिसे हम छोटा नाटो (NATO) भी मान सकते है। यह सैन्य गठबंधन हैं इसका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्य देशों को सुरक्षा प्रदान करना है। इस की स्थापना रूस ने 2 अक्टूबर 2002 में किया था। इसका मुख्यालय रूस की राजधानी मास्को में है। इस में छह सदस्य देश हैं सामिल है आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और रूस। यदि इस (CSTO) ग्रुप के सदस्य देशों पर यदि कोई अन्य देश हमला करता है तो सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा।

क्यों आर्मेनिया को (CSTO) ग्रुप छोड़ना पढ़ रहा है और क्या दुश्मनी है आर्मेनिया और अज़रबैजान के बिच ?

आर्मेनिया का गठन 1992 में यूएसएसआर (USSR) के टूटने के बाद हुआ था और तब से इसे अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पडोसी देश अज़रबैजान ने आर्मेनिया पर हमला कर नागोर्नो-कारबाख़ (Nagorno-Karabakh) के बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था तभी रूस ने अज़रबैजान पर कोई एक्शन नहीं लिया। अभी भी अज़रबैजान लगातार आर्मेनिया पर हमला करता रहेता है पर रूस या अन्य CSTO ग्रुप वाले देश इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। रूस लंबे समय से यूक्रेन के साथ युद्ध में व्यस्त है। इस कारण अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान ने CSTO ग्रुप से बहार निकलने का कड़ा फैसला लिया है।

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आर्मेनिया भारत संबंध

आर्मेनिया भारत संबंध:आर्मेनिया समझता है कि भारत का रक्षा उद्योग तेज़ी से मजबूत हो रहा है और दोनों देशों आर्मेनिया भारत संबंध गहरे हैं। आर्मेनिया चाहता है की वह भारत से ब्रह्मोस मिसाइल, तेजस लड़ाकू विमान और आकाश मिसाइल रक्षा प्रणाली जैसे सैन्य उपकरण खरीदे। आर्मेनिया भारत संबंध और भी मज़बूत हो जाएंगे जिससे आर्मेनिया और भारत दोनों देश को फायदा होगा

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