Bharat से China की दुश्मनी के बावजूद Bharat China का नंबर 1 Trade पार्टनर कैसे

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भारत के टॉप 2 ट्रेडिंग पार्टनर्स, चाइना और अमेरिका हैं।साल 2022-23 में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर अमेरिका हुआ करता था लकिन चाइना ने अमेरिका को ओवरटेक करदिया।

पिछले दो साल में भारत ने अमेरिका के साथ 9 लाख करोड़ का कारोबार किया, भारत से अमेरिका जाने वाले माल की कीमत करीब 6 लाख करोड़ थी, वहीं अमेरिका से भारत आने वाले माल की कीमत 3.1 लाख करोड़ थी।

पिछले दो साल में भारत ने चाइना के साथ 9 लाख करोड़ का कारोबार किया, भारत से चाइना  जाने वाले कुल माल की कीमत सिर्फ 1.3 लाख करोड़ थी, वहीं चाइना  से भारत आने वाले माल की कीमत 8 लाख करोड़ थी। पिछले कुछ वर्षों में भारत चाइना से और अधिक माल आयात करने लगा है।

इन आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के साथ भारत Trade Surplus में है जबकि Bharat China के साथ Trade Deficit में है।

Trade Surplus और Trade Deficit के बीच अंतर

व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) तब होता है जब किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक होता है, यानी वो देश विदेश में अधिक वस्तुएं बेचता है। व्यापार घाटा (Trade Deficit) तब होता है जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक होता है, यानी वो देश विदेश से अधिक वस्तुएं खरीदता है।

Make in India के दौर में भी Bharat China से ज्यादा आयात क्यों करता है?

अमेरिका के मुकाबले चीन से ही भारत की इम्पोर्ट इसलिए ज्यादा है क्योंकि Bharat China पड़ोसी देश है तो दूरी बहुत कम हो जाती है माल imports और exports करने के लिए और चीन दुनिया का नंबर 1 मैन्युफैक्चरिंग हब है क्योकि चीन की गवर्नमेंट बहुत सारी सब्सिडीज अपने मैन्युफैक्चरिंग कंपनीज को प्रोवाइड करती है

इसी वजह से इन कंपनीज के ऊपर प्रेशर नहीं रहता और चीन सस्ते दाम पर अमेरिका,भारत और पूरी दुनिए में अपने गुड्स को भेजते रहते हैं और इसी की वजह से चीन आसानी से प्रॉफिट कमा लेते हैं और फिर भारत निर्यात के लिए चीन पे निर्भर हो जाता है।

Bharat China से इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और स्वचालित डेटा प्रोसेसिंग मशीनें ,जयादा मात्रा में इंपोर्ट्स करता है और वही भारत चीन को सूती धागे (cotton yarn), petroleum and mineral oil एक्सपोर्ट्स करता है।

कैसे चाइना पे निर्भरता कम किया जाए?

अमेरिका और भारत दोनों ही चाहते हैं कि चाइना पे निर्भरता कम किया जाए। भारत को चीन पे निर्भरता काम करना है तो इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य रॉ मटेरियल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना होगा जो की इस फील्ड में भारत की तरफ से काफी फ़ास्ट काम चल रहा है और भारत को स्किल्ड मैन पावर ज्यादा करनी होगी। ये चीजें time lapse के साथ अपना रिजल्ट शो करती है।

2023 में अमेरिका को चीन के साथ काफी बड़ा व्यापार घाटा (Trade Deficit) का सामना करना पड़ा इसलिए अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक कार, बैटरी, सोलर सेल, स्टील एंड एल्युमिनियम और मेडिकल इक्विपमेंट के ऊपर 18 बिलियन डॉलर का टैरिफ लगाना स्टार्ट कर दिया।

अमेरिका इलेक्ट्रिक व्हीकल पे 100% लिथियम आयन बैटरीज पे 25% क्रिटिकल मिनरल्स पे २५ % टैरिफ लगाएगा।

अमेरिका इलेक्ट्रिक व्हीकल पे 100% लिथियम आयन बैटरीज पे 25% क्रिटिकल मिनरल्स पे २५ % टैरिफ लगाएगा

SOURCE: ANI NEWS

टैरिफ क्या होता है?

टैरिफ एक प्रकार का टैक्स होता है जो सरकार द्वारा आयातित या निर्यातित वस्तुओं पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य विदेशी वस्तुओं की कीमत बढ़ाकर घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना होता है

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