रूस-नार्थ कोरिया रक्षा समझौता: यदि रूस-नार्थ कोरिया पर अन्य देश हमला करते है तो दोनों देश मिलकर उस देश पर आक्रमण करेंगे

रूस-नार्थ कोरिया रक्षा समझौता

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन ने 19/ जून बुधवार को रूस-उत्तर कोरिया रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे मजबूत रूस-नार्थ कोरिया रक्षा समझौता है।

क्या है रूस-नार्थ कोरिया रक्षा समझौता

इस रूस-नार्थ कोरिया रक्षा समझौते के तहत किसी भी अन्य देश द्वारा नार्थ कोरिया या फिर रूस पर हमला होता है तो दोनो देश एक-दूसरे की मदद करेंगे। जैसे की नार्थ कोरिया अपनी पूरी सेना के साथ रूस को सहायता प्रदान करेगा, जिसमें मिसाइल से लेकर सेना की तैनाती शामिल होगी।

किम ने पुतिन को क्या उपहार दिया

पुतिन ने किम को ऑरस(Aurus) नामक एक शानदार रूसी कार जैसे उपहार और रूस के नए अंतरिक्ष तकनीक के साथ-साथ सैन्य सहयोग में वृद्धि से लुभाया है। तो वही किम ने पुतिन को स्थानीय नस्ल के पुंगसन (Pungsan)कुत्तों की एक जोड़ी भेंट की। जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी दोस्तों को चिंतित कर दिया है।

किम जोंग उन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

किम जोंग उन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा की “हमारे दोनों देशों के संबंधों को एक नए उच्च स्तर पर ले जाया गया है। जो क्षेत्र और दुनिया में शांति और सुरक्षा करते हुए एक मजबूत देश का निर्माण करते हैं, जो लोकतांत्रिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया और रूसी संघ के साझा हितों के अनुरूप है”।

पुतिन यात्रा के बारे में रूसी मीडिया ने क्या कहा

रूसी मीडिया के अनुसार मास्को, संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके पश्चिमी दोस्तों की रूसोफोबिया नीति से लड़ रहा है। पुतिन की नार्थ कोरिया की यात्रा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अपने कूटनीतिक अलगाव और एक दुष्ट राज्य के रूप में अपनी छवि को सुधारने के लिए आवश्यक थी।

पुतिन की वियतनाम की यात्रा

पुतिन उत्तर कोरिया की 2 दिवसीय यात्रा करने के बाद 20/जून गुरुवार की सुबह हनोई हवाई अड्डे पर पहुंचे, और उनका स्वागत वियतनामी उप प्रधान मंत्री ट्रान होंग हा (Tran Hong Ha)ने रेड कार्पेट पर किया।

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लैम और पुतिन ने असैन्य परमाणु परियोजनाओं, ऊर्जा और पेट्रोल सहयोग, शिक्षा और बीमारी की रोकथाम सहित क्षेत्रों में सहयोग के लिए 11 ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। पुतिन ने संवाददाताओं से कहा कि वार्ता रचनात्मक थी और दोनों पक्षों के पास प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर “समान या बहुत करीबी” स्थिति थी।

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