भारतीय एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स की तीसरी अंतरिक्ष यात्रा पर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर स्वागत

भारतीय एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स

तीसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गई भारतीय महिला एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स बोइंग नाम के स्पेसक्राफ्ट से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचते ही अपना उत्साह डांस के रूप में व्यक्त किया और फिर उन्होंने दूसरे सभी 7 एस्ट्रोनॉट्स को गले से लगाकर शानदार स्वागत के लिए धन्यवाद किया।

59 वर्ष की सुनीता विलियम्स के इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचते ही अन्य एस्ट्रोनॉट ने घंटी बजाया। आईएसएस की परंपरा है कि जब भी वहां कोई नया अंतरिक्ष यात्री पहुंचता है तो बाकी एस्ट्रोनॉट्स घंटी बजाकर उसका स्वागत करते हैं।

फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्चिंग के लगभग 26 घंटे बाद गुरुवार 6/जून रात 11बज के 3 मिनट पे सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 1 घंटे देरी से पहुचे। देरी का कारण मामूली हीलियम रिसाव जैसी तकनीकी गड़बड़ी ।

सुनीता विलियम्स एक नए चालक दल वाले अंतरिक्ष यान का संचालन और परीक्षण करने वाली पहली महिला बन गई। सुनीता ने स्टार लाइनर को डिजाइन करने में मदद की है जिसमें सात चालक दल बैठ सकते हैं।सुनीता जो पहले भगवान गणेश की मूर्ति और भगवत गीता को अंतरिक्ष में ले जा चुकी हैं। सुनीता विलियम्स महिलाओं के लिए प्रेरणा की किरण हैं।

वे अंतरिक्ष में लगभग एक सप्ताह बिताएंगे और विभिन्न परीक्षणों में सहायता करेंगे इसके अलावा वे वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। स्टारलाइनर से वापस पृथ्वी पर लौटने के दौरान उनका समुद्र की जगह जमीन पर उतरने का प्लान है।

बोइंग स्टारलाइनर विमान को अंतरिक्ष में अपनी पहली यात्रा पर उड़ाया और अपने पहले मिशन पर अंतरिक्ष यान का परीक्षण करने वाली पहली महिला बन गईं। NASA ने इसे अब तक उड़ाए गए सबसे उन्नत क्रू मॉड्यूल के रूप में देखा है।

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बोइंग ने अपने स्टारलाइनर विमान पर अंतरिक्ष यात्रियों को पहली बार स्पेस में भेजा जिसकी पायलट सुनीता विलियम्स थी। पहला मिशन के लिए उन्होंने अंतरिक्ष में जाने के लिए अपनी पैतृक भूमि भारत के ऊपर से उड़ान भरी थी।

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