तिब्बत चीन विवाद: तिब्बत को चीन से बचाने के लिए अमेरिका की शक्तिशाली टीम भारत आ रही है

तिब्बत चीन विवाद:

तिब्बत चीन विवाद को लेकर अमेरिका की स्पेशल टीम भारत आएगी, अमेरिका और भारत मिलकर तिब्बत मामले में बड़े कदम उठाएंगे। अमेरिका ने अब तिब्बत का मुद्दा उठाने का फैसला कर लिया है।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अमेरिका की शक्तिशाली टीम जैसे ही भारत आएगी तो भारत के प्रधान मंत्री मोदी और तिब्बत के दलाई लामा से मुलाकात करेगी।

हाल ही में अमेरिका की संसद (कांग्रेस) ने नई तिब्बत नीति को लेकर एक बिल पास किया, यह बिल सवाल उठता है कि क्या तिब्बत वास्तव में चीन का हिस्सा है, या चीन द्वारा जबरन कब्ज़ा किया गया है।

इस बिल पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन के हस्ताक्षर के बाद बिल पूरी तरह से पारित हो जायेगा। अमेरिका ने तिब्बत पर चीन के नियंत्रण के मुद्दे पर अपना पूरा ध्यान लगा दिया है।

तिब्बत चीन विवाद कैसे शुरू हुआ ?

10 मार्च 1959 को चीनी सरकार ने दलाई लामा को एक विशेष चीनी थिएटर प्रदर्शन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया लेकिन उनके अंगरक्षकों के बिना। इससे लोगों को आश्चर्य हुआ कि क्या चीनी सरकार दलाई लामा का अपहरण करने की कोशिश कर रही है या फिर हत्या।

इस घटना के लगभग 7 दिन बाद, 17 मार्च 1959 को, दलाई लामा गुप्तचर बन गए। उन्होंने भेष बदल कर तिब्बत से भाग निकले और भारत में शरण ले लिए। इसके बाद चीनी सेना ने तिब्बत पर आक्रमण कर देश पर कब्ज़ा कर लिया।

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यदि तिब्बत भारत का एक राज्य बन जाए: तिब्बत चीन विवाद

क्या होगा यदि तिब्बत भारत का एक राज्य बन जाए?

तिब्बत राज्य का क्षेत्रफल 1.23 मिलियन वर्ग किमी है और जनसंख्या केवल 3.65 मिलियन है, यह उत्तर प्रदेश से लगभग पाँच गुना बड़ा है और निश्चित रूप से पूरे भारत का सबसे बड़ा राज्य होगा।

भारत अपने भूमि क्षेत्र का 37.3%, अपनी जनसंख्या का 0.26% और अपने सकल घरेलू उत्पाद(GDP) का 0.85% बढ़ाएगा और इस एकीकरण का भारत पर बहुत बड़ा प्रभाव होगा।

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